उस गर्लफ्रेंड के लिए, जिसके पास मन शांत हो जाता है।
“आज बात नहीं करूँगा,” मैंने कहा।
उसने पूछा, “पास बैठ सकती हूँ?”
ऑफिस से लौटते वक्त बॉस की बातें कानों में थीं।
मैंने सिर हिलाया।
उसने बेंच से अपना बैग हटा दिया।
उसने टिफिन खोला। दो पराठे थे।
आधा मेरी तरफ़ बढ़ाया।
“ठंडा है। खा लोगे?”
तीन महीने से हम इसी बेंच पर मिलते थे।
आज उसने ऑफिस के बारे में कुछ नहीं पूछा।
मैं धीरे-धीरे खाना खाने लगा।
बीस मिनट बाद मैंने कहा, “आज बहुत बुरा दिन था।”
वह बोली, “बताओ।”
इस बार मैंने “कुछ नहीं” नहीं कहा।
“तुम्हें कैसे पता था कि मुझे अकेला नहीं छोड़ना?”
वह मुस्कुराई, “पहली मुलाकात याद है?”
“उस दिन मैं रो रही थी… तुम भी बस पास बैठे थे।”