पापा अस्पताल में थे।
वह दोस्तों के बीच बैठा सबको हँसा रहा था।
तभी माँ का फोन आया।

लौटकर बोला,
“लगता है अब मेरी बाइक बिकेगी।
वैसे भी पेट्रोल बहुत महँगा है।”
सब हँसे। वह भी।

अगले दिन ग्रुप में बाइक की फोटो आई—
“कोई खरीदार हो तो बताना।”
मैंने फोन किया,
“तू सच में बेच रहा है?”

“हाँ, पापा के इलाज के लिए।”
“कल बताया क्यों नहीं?”
“बताया तो था…
बस हँसकर बताया था।”

“मुझे लगा तू मज़ाक कर रहा है।”
वह चुप रहा, फिर बोला,
“सीधे पैसे माँगता तो…
अगली बार मेरा फोन उठाता?”

अस्पताल पहुँचकर मैंने उसे फोन किया।
“नीचे आ।”
“क्यों?”
“आज तेरी बात सुनने आया हूँ।”

वह नीचे आया।
पहली बार मुझे देखकर हँसा नहीं।